ll दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं ।l

मावस के अंधियारों में जब, घनघोर अंधेरा छाता है l

आशाओं के ज्योति कलश से, इक दीपक कोई जलाता है l

क्षोभ, भय, ग्लानि तमस हैं, अंतर्मन उजियारा है l

गत – विगत हर युग में, अधर्म धर्म से हारा है l

जग – मग दीपों की ज्योति से, जीवन पथ आलोकित हो l

मां लक्ष्मी के शुभ प्रसाद से, धन – धान्य, हर्ष प्रतिपादित हो l l

गणपति शीश नवाए के, कर लक्ष्मी का ध्यान l

रघुनंदन ये वंदन करें, करें विश्व कल्याण l

दीपोत्सव की मंगल ज्योति, दुख-तम का करे निदान ।

शुभ समृद्धि, सर्व मंगल हो, यश-वैभव प्रभु करें प्रदान ll

अधर्म पे धर्म की, हर काल में विजय हो।

दुष्कर्म का दमन हो, हर दुष्ट का दहन हो।I

हर भक्त के ह्रदय में, प्रभु राम जी विराजें।

संकल्प, सत्य-निष्ठा, मां जानकी सा द्रण हो।I

नव दीपों की शुभ आभा से, तम का हर विध्वंस मिटे ।

पूजन की पावन ज्वाला से, हर विघ्न-व्याधि का द्वंद मिटे ।I

हर जीवन पथ आलोकित हो, संकल्पों को शुभ अन्त मिले ।

शुभ लक्षित सभी प्रयासों को, प्रभु सिया-राम का संग मिले ।I

लंका विजय कराए के, प्रभु आवात निज धाम ।

वैदेही,लखन,प्रभु साथ में, वानर और हनुमान ।I

पुल्कित डगर निहारते, पुर वासी अविराम ।

दरस विकल-जन पाए के, पा जाते सुर धाम ।I

रघुकुल श्री के चरण में, विनती करत सुजान।

नारायण वर दीजिए, नित हिय बसें सिय-राम।I

हे राम ये आशीष दो, प्रभु चरण में ही आस हो ।

न अहं हो न दम्भ हो, सत्कर्म में विश्वाश हो ।।

सत पथ सदा प्रशस्त हो, मृदु भावना का वास हो ।

सामर्थ्य देना वो प्रभु, परमार्थ व हितार्थ हो ।।

वाणी मृदुल-शीतल रहे, सभी व्याधियों का नाश हो ।

अंतःकरण में भी सदा, सिया-राम ही का वास हो ।।

आशा के दीपकों से, चमकती ये दिवाली है ।

व्याधि विमुक्त होने को, लरज़ती ये दिवाली है ।I

चिन्ता के बन्धनों में, कुछ वक़्त ऐसा ठहरा ।

अपनों का साथ छूटा, औरों का साथ अखरा ।I

जो ये दिल मेरा हमेशा, पंछी सा चाहे उड़ना ।

लाचारी के पिंजड़े में, दिन रात कितना तन्हा ।I

राघव तेरी दया से, इस तम का समापन हो ।

तेरे आगमन से, चहकता सा हर चमन हो ।I

दीपों की रोशनी से, खुशियों की अलख जागे ।

जय घोष गूँजे तेरी, अपनों से फिर मिलन हो ।I

दुःख भी न कोई पाए, अपनोँ से न कोई बिछड़े ।

तेरी कृपा से अब बस, राम राज का सृजन हो ।।

मावस के इस अंधकार में, आशाओं के दीप जलें ।

नवमंडल आभामय हो, दमक कांति नवरूप सजें ।।

जग समग्र प्रकाशवान हो, यश वैभव नित नीर बहें ।

लक्ष्मी जी के पदचापों से, ह्रदयों में मृदंग बजें ।I

मावस की इस कलुष रात्रि में, अंधकार चहुँ छाया है ।

तम को आच्छादित करने को, नहीं चंद्र की काया है ।I

कृष्ण पक्ष के अंधकार में, आशा की अलख जगाएंगे ।

तम पर प्रकाश के विजय पर्व पे, निज चित्त प्रभु राम बसाएंगे ।।

जय गणेश के मंगल स्वर से, सब विघ्नों का ताप हटे ।

लक्ष्मी जी के शुभ आगम से, जीवन भर उल्लास रहे ।।

रिद्धि – सिद्धि की शुभ संगति में, दीपों की शुभ बेला में ।

यश वैभव से परिपुरीत, हर्षित मधुमय ये काल रहे ।।

दीपों के इस शुभ प्रवास में, श्री राम लला अवतार करें ।

व्यसनों को विध्वंस करें, व दुष्टों का संहार करें ।

परम विष्णु के वचनुसार ही, सत्य विजयी तो होना है ।

चरमोत्कर्षित कलयुग का, अब अन्त – समापन होना है ।

निर्मल मन से – पुलकित तन से, स्व – हृदयों का द्वेष मिटाएंगे ।

सत्य दीप आलोकित करके, प्रभु राम राज्य पुनः लाएँगे ।।

जग के मन के अंधकार को, शुभ पावक एक लगाएंगे ।

नव दीपों को प्रज्वलित करके, तम को दूर भगाएंगे ।

नव प्रकाश की इस बेला में, यह पवन प्रण लेते हैं ।

इस जग में निज अंतर्मन में, नित दीपक एक जलाएंगे ।।

शुभ दीपों के शुभ प्रकाश में, ये मनोकामना करते हैं ।

पुलकित मन से स्वजनों के संग, नित दीपक पर्व मनाएंगे ।।

हे गणपति, रिद्धि सिद्धि विनायक, ऐ प्रभु ऐसा वर दो ।

शुभः, मँगल, हर नवप्रयास हो, त्वरित, सुगम, प्रतिफ़ल हो ।

प्रजवल्लित दीपों की ज्योति, तम का,दुःख का नित नाश करे।

दशा, दिशा आलोकित चहुँ हों, महालष्मी चिर वास करें ।।

मावस की रात में ऊजारा करन को, खुशियों से रोशन ये दीपन की माला है ।

प्रेम के रंगो की रंगोली से निखरती, पुष्पों के रस वाली मीठी सी ये हाला है ।।

खीलौं बताशो और मिठाई पकवानों वाली, रोशनी से झिलमिल ये अलबेली ज्वाला है ।

कमल के पुष्प पे लक्ष्मी जी बिराजत हैं, मूषक सवारी ले गणपति आला है ।

प्रभु राम की आप पे कृपा सदा बनी रहे, आप को ये संदेश मंगल कामना वाला है ।।

दीपों की इस अगन से, हर्षों का नव सृजन हो ।

लक्ष्मी की वन्दना से, शुभ लाभ का आगम हो ।I

इस बार की दिवाली, शोभित हो इस तरह से ।

स्वप्नों को सब के पूरित, अपनों को संग कर दे ।।

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