I। नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं ।l

नवजात शिशु की किलकारी सा शुभ गुंजन छाओ रे, सखी री मंगल गाओ रे ।

मृदु सुयोग की मुठ्ठी भींचे , नव युग मुस्काओ रे, सखी री मंगल गाओ रे ।I

कोमल पद के शुभ कम्पन से घुंघरु छनकाओ रे, सखी री मंगल गाओ रे ।

ठुमक चलत हर डगमग पग से, नव डगर बनाओ रे, सखी री मंगल गाओ रे ।I

नए वर्ष के सूर्योदय से, नव कोंपल पुष्पित हों l

कुसुमों से सज्जित हो जीवन, हर प्रसंग मधुमय हो lI

कस्तूरी की गन्ध बसे व, कलरव का गुन्जन हो ।

नव वर्ष के हर इक क्षण में, मुदित हृदय व मन हो lI

शुभ ओज से आलोकित, नव सूर्य को नमन हो l

मन में प्रकाश भर दे, अज्ञान का शमन हो lI

हर कर्म को दे साहस, हर कार्य को सफलता ।

नव वर्ष में सभी को, शुभ लाभ का वरण हो lI

पूर्व की नभ लालिमा से, नव वर्ष का उपकर्म हो।

नव सूर्य की पावन तपन से, सब व्याधियों का अन्त हो।I

सत्कर्म की हो भावना, बल-बुद्धि का भी संग हो।

सुख संपत्ति की सदा वर्षा रहे, आनन्द ही आनन्द हो।I

नव वर्ष की नवप्रभा से, नव प्रेरणा का जन्म हो ।

सतकर्म से हो पथ प्रकाशित, भय भ्रान्तियों का अन्त हो ।I

नव भाव हो नव राग हो, नव चेतना का वास हो ।

जीवन पुनः स्वच्छंद हो, हर हृदय में आस हो ।।

मानवी की इस घुटन का, अंत होना चाहिये ।

पुनः जीवन का प्रवाह स्वछन्द होना चाहिये ।I

नव वर्ष की नवप्रभा में, है ये मङ्गल कामना ।

सौभाग्य की आभा से ओजित, मानव वंश होना चाहिये ।।

सूर्य की पहली किरण से हर रात्रि का उत्कर्ष हो ,

नवसृजन के हौसलों से हर हृदय में हर्ष हो ।

पुष्पों की मुस्कान से हर ऊषा का प्रारम्भ हो ,

सम्पूर्णता की तुष्टि से हर सन्ध्या का भी अन्त हो ।I

पक्षियों के कलरवों से नित प्रातः बेला मस्त हो ,

परम सुखों की लालिमा में हर दिवस का अस्त हो।

हर स्वप्न के, हर ख़्वाब की सीमा तो बस अर्श हो ,

पुरुषार्थ के प्रयास से , परी पूर्णता का वर्ष हो ।I

गत हो चुका है यारों, पिछला बरस पुराना ।

कुछ यादें मीठी दे कर, कुछ रंजो का फ़साना ।।

नए साल की है ये दस्तक, नए ख्वाबों का कैनवस भी ।

नयी कोशिशों की कलम है, नयी हसरतों का रँग भी ।।

नयी चाहतों को लेकर, एक नयी ज़मीं बनाएं।

सपनों के रँग भरकर, नया आसमान बनाएं।

दिलों की ख़लिश मिटा कर, सबको गले लगाएं ।

इस साल साथ मिल कर, एक जहां नया बनाएं।।

कलियों की मंद मुस्कुराहट से, पंछियों के कलरव की आहट से ।

हवा के झोंकों की अजब खुशबू से, दिल की लरज़ती धड़कन से ।।

लगता है कोई आता है, मन के तारों को छेड़ जाता है ।

कल की यादों को सहेज लो, हर गुज़रते पल से ।

नई खुशियों से भरा साल, बस अब आता है ।।

सूर्य की आभा से सज्जित, पुष्पों के गंधों से पूरित।

पंछियों के मधुर सुर से, युक्त व शोभित रहे ।

नव वर्ष की नव प्रभा, शुभ कर्मों से प्रेरित रहे ।।

नव वर्ष का सूर्योदय, हर जीवन को फलकारी हो ।

गत कष्टों का ये ताप हरे, नित शीतल मंगलकारी हो ।I

पुष्पों की गंधों से संचित, मृदु भावों से सत रंगित ।

मँगल कलरव का गान रहे, स्वप्निल सुखमय ये काल रहे ।।

नव वर्ष के नव प्रभात में, दुःख विस्मृत गत सारे हों।

सुखद पलों को अंगीकृत करने को, तत्पर हृदय हमारे हों।।

नव सृजन व नव प्रयास को, नित प्रेरित करते जायेंगे।

निज धरती व जन सेवा को, जीवन का लक्ष्य बनाएंगे।।

विगत वर्ष की स्मृतियों से, खुशियों के स्मरण चुराएंगे।

सुखद पलों के ये मोती, माला में बिनते जायेंगे।।

दुखी पलों व कठिन समय को, विस्मृत करते जायेंगे।

नव आशा, प्रफुल्ल चित से, नव युग को हृदय लगाएंगे।।

जीवन रूपी मृदु माला में, सत रंगों की भरमार रहे ।

नव नूतन, नव विकसित पुष्पों से, शुभ शोभित ये साल रहे ।।

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