बम-बम का नाद करके, गणकों ने भांग घोली I
डमरू पे नाचे नंदी, भैरों ने तान छेड़ी ।I
डम-डम डमक-डमक पे, झूमें सकल चराचर I
गौरी गणेश के संग, शम्भु मनाएं होली ।I
महाकाल की कृपा से, ध्वंसित हों विघ्न सारे I
रंगों के वसंतोत्सव में, सुख की बयार बरसे ।I
होली की इस अगन में , दुश्वारियां दमन हों ।
पावक की उष्णता से , दुःख-रोग का शमन हो lI
फाल्गुन की पूर्णिमा में, रस-रंग ऐसा बरसे ।
रंगित धरा हो सारी, रंगीन तन व मन हो I।
ढोलक की थाप पे यों, मदमस्त नाचें राधा I
जीवन में ज्यों हमारे, कान्हा सदा ही संग हों ।I
फाल्गुन की पूर्णिमा में, रस की बयार बरसे I
टेसू से महकें तरूवर, रंग की फुहार बरसे ।I
ढोलक की थाप पर, हर घर में नाचे राधा I
हर भक्त के जीवन में, घोलें गुलाल कान्हा।I
फाल्गुन की पूनम में अमृत सा छलके I रंगों के बादल से जीवन सा बरसे lI
ऋतुओं के मिलने से पगला सा मौसम,अल्हड़ सी भूलों को बचपन सा मचले ।I
कान्हा सा पुरीत हो जन जन का जीवन,राधा की भक्ति के रंगों सा होले ।I
पतझड़ के मौसम़ में, ख़ुशबू सी छाई है ।
सूखे से पेड़ों पे, हरिय़ाली आई है ।I
हँसते से पौधों पर, फूलों की रौऩक है ।
धुँधले से वो दिन अब, धूपों से रौश़न हैं ।I
उलझे से चेहरों ने, मुस्कानें पायीं हैं ।
मौसम के रँगों से, म़दहोशी छाई है ।
गाओ रे – झूमों रे, लो होली आई है ।I
फ़ागुन का मस्त मौसम, क़ुदरत ने तान छेड़ी ।
चहुँ फ़ूल मुस्कुराएं, कलियाँ करें ठिठोली ।।
कोयल की कूक मीठी, कहीं कलरावों की बोली ।
हर्षित हरित ये धरती, अदभुत छटा बिखेरी ।।
ढोलक पे नाचे राधा, बृज में मनाये होली ।
जीवन में रँग भर दे, कान्हा की आज टोली ।।
मुरलि के मधुर स्वर में, कान्हा ने तान छेड़ी ।
मधुवन समस्त पुलकित, सुध-बुध सभी ने छोड़ी ।।
बरसाने की गोपियों की, अल्हड़, मधुर ये टोली ,
बृज के समस्त ग्वाले, मद-मस्त खेलें होली ।।
होली के रँग ये ऐसे, रंगित करें कि जैसे ।
राधा के पीत रँग में, श्यामल ये छाप छोड़ी ।।
फ़ागुन का मस्त मौसम, रंगों की ये फुहारें I
टेसू के सँग में महकें, अपनों की यादगारें II
भंग की तरँग में, मदमस्त हूँ इस तरह से I
हर दिल् में खुशियाँ देखूँ, हर रँग में नज़ारे II
होली की इस ख़ुशी में, कुछ ऎसा मन्नू कर दूँ I
गालों में आपके भी, अपना ही रँग भर दूँ II
फाल्गुन की पूर्णिमा में ,एक ऐसा चाँद निकले ।
पावक को कर दे शीतल, जीवन में रँग भर दे ।I
मद मस्त इस पवन से, इतनी अरज हमारी ।
अपनों के तन को छू कर, खुशियों का रंग मल दे ।।
जीवन की त्वरितता में, ये जग हुआ है बेरंग ।
भंगुर सुखों की धुन में, कलरव बना है क्रंदन ।।
होली की शुभ अगन में, द्वेषों को होम कर लो ।
जीवन कलश के घट में, रिश्तों के रंग भर लो ।।
निश्चल हृदय के सत से, हर मन को संगी कर लो ।
सब को गले लगा कर, बेरंग को रंगी कर दो ।।
टेसू के पीत रंग में, कान्हा की प्रीत घोली ।
ढोलक के मधु सुर में, राधा की मीठी बोली ।I
रंगों के मेघ बरसें, फाल्गुन की ये रंगोली ।
जीवन में रंग भर दे, रंगीत करे ये होली ।।
हर रंज के सदमे से, ये रात ये बोली है ।
हर ग़म को भस्म कर दो, ये खुशियों की होली है ।।
किस्मत में सभी के ही, न रंगों की रचना है ।
इस जग में रँग भर दें, होली की तमन्ना है ।।
गालों में रँग भर दो, बेरंग को रंगीं कर दो ,
दुश्मन को भी गले लगा कर, होली में रँग भर दो ।।
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